Surah Fatiha Ki Fazilat, Surah Fatiha Ke Fayde, Sura Fatiha

Surah Fatiha Ki Fazilat

Surah Fatiha Ki Fazilat नमाज़ की शुरआत सुराह अल्हम्द से ही क्यों हो रही है वजह क्या है कोई और सुराह भी तो सकता था बाकायदा फज़ल इब्ने शज़ान ने हमारे 8 वे इमाम अली रज़ा अ. स. से रिवायत बयांन की है के इमाम ने फ़रमाया क़ुरआन में कोई सुराह और कलाम ऐसा नहीं है जिसमे सुराह हम्द के बराबर खैरो बरक़त पायी जाती हो इस वजह से नमाज़ का आगाज़ सुराह हम्द से किया जाता है !

रसूले खुदा जब मैराज पर तशरीफ़ ले गए तो वहा पर पैगम्बर को नमाज़ का हुक्म हुआ पैगम्बर नमाज़ के लिए खड़े हो गए तो परवरदिगार की तरफ से वही आई के ऐ मेरे बन्दे मेरा नाम तो लो, तो पैगम्बर इस्लाम ने उस वक़्त कहा अल्लाह हो अकबर, उसके बाद कहा बिस्मिल्लाह हिर रेहमान हिर रहीम और इस वजह से रिवायतों में बयान हुआ के बिस्मिल्ला को हर सुराह के शरू में रखा गया !

Sura Fatiha

उसके बाद फिर परवरदिगार की तरफ से वही नाज़िल हुई मेरे बंदे मेरी हम्द तो करो उसके बाद पैगम्बर इस्लाम ने सुराह हम्द की तिलावत शरू की , उसूले ऐ काफी की रिवायत है इस तरीके से नमाज़ो के अंदर ये तरीके कार करार पाया के नमाज़ की पहली और दूसरी रकत में सुराह हम्द पढ़ा जाता है और ये भी है इस सुराह को पढ़ने से दो तिहाई क़ुरआन पढ़ने का सवाब आपको मिलता है !

Fatiha Ka Tarika

अब आप सोचिये आप हर नमाज़ में काम से काम दो बार सुराह को पढ़ते है तो आपको सुराह हम्द पढ़ने का कितना सवाब मिलेगा !

ये इतना अज़ीम सुराह है के रिवायत में आया है के अगर सुराह हम्द को एक पडले में रख दिया जाये और क़ुरआन के तमाम दीगर सुराह को दूसरे पडले में रख दिया जाये तो अल हम्द वाला पड़ला साथ गुना ज़्यादा भारी होगा !

Surah Fatiha Ki Fazilat

खास तोर पर रसूले खुदा ने दर्द जिस वक़्त जिस्म में हो रहा हो, सर में या जिस्म में कहि भी तो उस वक़्त सुराह हम्द पढ़ने की बहुत ताक़ीद की गयी है और इस सुराह के अंदर एक खसूसियत ये भी है के परवरदिगार ए आलम ने आपको एक अज़ाज़ बक्शा है यानी इस सुराह की तिलावत में आप है और परवरदिगार, आप और परवरदिगार के दरमियान ना कोई फरिश्ता है और ना कोई मलक !

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