Dua e Hazeen in Hindi, दुआ-ए-हज़ीन, Dua Hazeen Benefits

Dua e Hazeen in Hindi

Dua e Hazeen in Hindi

Dua e Hazeen in Hindi: वह परवरदिगार जिसकी शहादत काफ़ी है, अब तू मेरा ग्वाह बनजा कि मैं भी सच्ची नियत के साथ इस बात की ग्वाही देता हूँ कि तेरे लिये फज्ल व एहसान है कि तूने मेरे ऊपर नेअमतें नाज़िल की अगरचे मैने तेरा शुक्र अदा नहीं किया, ऐ हर इरादे के पूरा करने वाले मुहम्मद व आले मुहम्मद पर रहमत नाज़िल फ़रमा और मुझे अज़ाब से पहले अमान अता फरमा !

दुआ-ए-हज़ीन

बिसमिल्ला हिर रहमानिर रहीम उनाजीका या मौजूदा फी कुल्लि मकानिन लअल्लका तसमउ निदाई फ़क़द अजु-म जुर्मी व कल्ला हयाइ, मौलाया या मौलाया अय्यल अहवालि अतज़क्करू व अय्यहा अनसा व लौ लम यकुन इल्लल मौता लकफ़ा कैफ़ा वमा बादल मौति आजमु व अदहा मौलाया या मौलाया हत्ता मता अकूलु लकल उतबा मररतन बादा उख़रा सुम्मा तजिदु इन्दी सिदकन वला वफाआ फ़या गौसाहु सुम्मा वा गौसाहु बिका या अल्लाहु मिन हवा कद गलबनी व मिन अदुववन फ़कदिस तकलबा अलय्या व मिन दुनया कद तजय्यनता ली व मिन नफ्सिन  अम्मारतिम बिस्सूइ इल्ला मा रहिमा रब्बी मौलाया या मौलाया इन कुन-त रहिमता मिस्ली फरहम्नी व इन कुन्ता कबिल्ता मिस्ली फकबलनी या कबिलस्सहरति इक्बल्नी या मन लम अज़ल अतअररफु मिन्हुल हुस्ना या मन युगज्जीनी बिन्नी-अमि सबाहंव व मसाआ. इरहम्नी यौ-म आतीका फ़रदन शाखिसन इलैका बस्री मुकल्लदल अमली कद तबररआ जमीउल खल्की मिन्नी नअम व अबी व उम्मी व मन काना लह कद्वी व साअयी फइन लम तरहम्नी फमन यर-हमुनी व मंय यूनिसु फिल कब्रि वहशती व मंय युनतिकु लिसानी इज़ा ख़लौतु बिअमली व सअल्तनी अम्मा अन्ता आलमु बिही मिन्नी फ़इन कुल्तु नअम फ़अयनल महरबु मिन अदलिका व इन कुल्तु लम अफ्अल कुल्ता अलम अकुनिश्शुह-द अलै-क अफवु-क अफवु-क या मौलाया कब्ला सराबीलिल किरानि अफ्वुका अफ्वुका या मौला–य कब-ल जहन-न-म वन्नीरानि अफवु-क अफवु-क या मौला–य कब-ल अन तुगल्लल ऐदी इलल्ल आनाकि या अरहमर राहिमीन व खैरल गाफिरीन।

तर्जुमाः Dua e Hazeen in Hindi

मैं तुझसे मुनाजात करता हूँ, ऐ मेरे परवर दिगार जो हर जगह मौजूद है शायद तू मेरी आवाज़ सुन ले इस लिये कि मेरा जुर्म बहुत ज्यादा है, मेरी हया खत्म हो गई है खदा या मैं किस किस खौफनाक मंज़िल को याद करूं, और किस को भूल जाऊँ, अगर सिर्फ मौत ही होती तब भी काफी था लेकिन मौत के बाद बहुत सख्त मंजिल है, खुदाया कब तक और कहाँ तक मैं तुझ से बराबर रज़ा की दरख्वास्त करता रहूँगा और तु मेरे अंदर कोई सदाक़त और वफ़दारी ना पाएगा,

फरयाद फरयाद। खुदाया इस ख्वाहिश से जो मुझ पर गालिब आगई है, जिस दुश्मन ने मुझ पर कब्जा कर लिया है, दुनिया मेरे सामने आरास्ता हो गई है और वह नफ्से अम्मारह जो बुराइयों का हुक्म देने वाला है, मेरे परवरदिगार अगर तूने मुझ जैसों पर रहम किया है तो मुझ पर भी रहम फ़रमा। अगर मुझ जैसों की तौबा कुबूल की है तो मेरी भी तोबा कुबूल करले। ऐ रात के जागने वालों की तौबा कुबूल करने वाले, ऐ वह खुदा जिस को मैने हमेशा नेकी में ही देखा है, ऐ वह परवरदिगार जो सुबह व शाम रिज्क अता फरमाता है। मुझ पर रहम करना उस दिन जिस दिन में तन्हा तेरी बारगाह में हाजिर हूँ इस तरह कि मेरी निगाह झुकी हुई हो, आमाल का बोझ मेरे ऊपर हो और तमाम इन्सान यहां तक कि मेरे माँ बाप और जिनक लिय मन सारी ज़िन्दगी दौड़ धूप की है सब मुझ से बेज़ार हो जायें। खुदा या अगर तु रहम ना करेगा तो कौन करगा,

कौन मेरी कब्र में राहत का सामान करेगा, कौन शख्स मेरी जबान को बोलने वाला बनाएगा। फिर जब मैं अपने आमाल के साथ हाज़िर हूँगा और तू तो उन बातों का सवाल करेसगा जिन को तू मुझसे बेहतर जानता है अगर मैं इकरार करलूँ तो तेरे इन्साफ से भाग कर कहाँ जाउंगा। और अगर ये कह दूं कि मैने नहीं किया तो तू कहेगा क्या मैं तेरा ग्वाह नहीं था, खुदा या अब मुझे माफ़ करदे, मुझे माफ़ करदे इस से पहले कि आग का लिबास मुझे पहनाया जाए, इस से पहले कि मेरे हाथों को गरदन में बांध दिया जाए। ऐ बहतरीन रहम करने वाले और बेहतरीन माफ़ करने वाले। खदा या मेरा अकीदा ये है कि तेरी मखलूकात में कोई एसा नहीं है जिसके साथ तूने मुझसे ज्यादा अच्छा बरताव और सुलूक किया हो, मुझसे ज्यादा करामत दी हो, मुझसे ज्यादा फज्ल और एहसान किया हो, मुझसे ज्यादा उस पर महरबानी की हो, मुझसे ज्यादा उसकी हिफाजत की हो और मुझसे ज्यादा उसक साथ नरमी का बरताव किया हो। अगर चे तमाम मखलूकात सब वैसे ही समझते हैं जैसे मैं समझता हूँ।

वह परवरदिगार जिसकी शहादत काफ़ी है, अब तू मेरा ग्वाह बनजा कि मैं भी सच्ची नियत के साथ इस बात की ग्वाही देता हूँ कि तेरे लिये फज्ल व एहसान है कि तूने मेरे ऊपर नेअमतें नाज़िल की अगरचे मैने तेरा शुक्र अदा नहीं किया, ऐ हर इरादे के पूरा करने वाले मुहम्मद व आले मुहम्मद पर रहमत नाज़िल फ़रमा और मुझे अज़ाब से पहले अमान अता फरमा और मुझे खूब नेअमत अता फ़रमा, मगफिरत के सहारे मुझ पर खैर की बारिश फ़रमा, मुहम्मद व आले मुहम्मद पर रहमत नाज़िल फ़रमा और मेरा हिसाब मेरे बद तरीन सीरत व किरदार से ना करना। मेरे दिल का इम्तेहान अपनी रज़ा के लिये कर ले और जो कुछ भी मैं तेरे कुर्ब के लिये कर रहा हूं उसे खालिस बना दे। इस में कोई शुबा या कोई फख्र या कोई रिया कारी ना पैदा होने पाए।

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