Ziyarat E Ashura Parhne Ka Tarika| Ziyarat E Ashura Hindi

Ziyarat E Ashura Parhne Ka Tarika 

Ziyarat E Ashura Parhne Ka Tarika बहुत से हमारे मोमनीन मोमेनात ज़ियारत ए आशूरा बहुत ही कसरत के साथ पढ़ते है लेकिन बहुत से ख्वातीन ओ हज़रात इस वजह से ज़ियारत ए आशूरा पढने से रह जाते है के वो सोचते है के हम ज़ियारत ए आशूरा किस तरीके से पढ़े उसमे 100 लान है 100 सलाम है वक़्त बहुत ज्यादा लगेगा !

पहला तरीका

ज़ियारत ए आशूरा पढ़ने का आसान तरीका इमाम अली नक़ी अ.स. (अल्लाह हुम्मा सल्ले अला मोहम्मद वा आले मोहम्मद) ने फ़रमाया है आप फ़रमाते है एक मर्तबा तो कामिल लान पढ़ली जाए और उसके बाद 99 बार अल्लाह हुम्मा अनहुम जमिआ पढ़ ले !

और इसी तरह एक मर्तबा पूरा कामिल सलाम पढ़ले और उसके बाद 99 मर्तबा ये कहे अससलामो आलल हुसैन वा आला अली इबनल हुसैन वा आला ओलादिल हुसैन वा आला असहाबिल हुसैन !

दुसरा तरीका

जब आप लान पढ़ते हुए आएगे तो एक बार आपको मुकम्कमल लान पढ़ना है और दुबारा में सिर्फ आपको अल्लाह हुम्मा अनहुम जमिआ पढ़ना है और ये पढने के बाद कहना है तीसा ओ तीसीन मर्रा कहना है (तीसा ओ तीसीन 99 को कहते है ) जैसे अल्लाह हुम्मा अनहुम जमिआ तीसा ओ तीसीन मर्रा !

इसी तरह जब आप सलाम पर आएगे तो एक बार आपको मुकम्मल सलाम पढ़ना है और दुबारा में सिर्फ आपको अससलामो आलल हुसैन वा आला अली इबनल हुसैन वा आला ओलादिल हुसैन वा आला असहाबिल हुसैन पढ़ना है और ये पढने के बाद कहना है तीसा ओ तीसीन मर्रा कहना है (तीसा ओ तीसीन 99 को कहते है ) जैसे अससलामो आलल हुसैन वा आला अली इबनल हुसैन वा आला ओलादिल हुसैन वा आला असहाबिल हुसैन तीसा ओ तीसीन मर्रा

Ziarat E Ashura Ke Fawaid

ख़वातीन का अक्सर सवाल होता है के ज़ियारत ए आशूरा वगैरा के जो अम्ल होते है ४० रोज़ के तो उसमे हमारे महाना अदद की वजह से कुछ वक्फे आ जाते है तो हम किस तरह से ४० रोज़ का अम्ल करे !

ऐसी हालत में भी आपको ज़ियारत को छोड़ने की ज़रूरत नही है उस हालत में भी ज़ियारत ए आशूरा पढ़ी जा सकती है अलबत्ता सिर्फ नमाज़े ज़ियारत नही पढ़ी जाएगी वरना इसमें सजदा भी किया जाएगा दुआ और अस्कार भी पढ़े जा सकते है खुद ज़ियारत ए आशूरा भी निजासत की हालत में पढ़ी जा सकती है !

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